
by himucoolrider
ब्रह्मांड के उस अंतिम छोर पर, जहाँ प्रकाश की किरणें भी दम तोड़ देती हैं और समय का पहिया थम जाता है, वहाँ एक 'वॉइडेक्स' (Void Channel) सक्रिय हुआ। हज़ारों सालों की खामोशी एक भयानक गर्जना के साथ टूटी। उस अनंत अंधकार के गर्भ से एक आकृति उभरी—हिमुकुलराइडर (The Ice Emperor)। उसके कंधे पर दो विशाल श्वेत हिम सर्प (Ice Snakes) लहरा रहे थे, जिनकी आँखों में ब्रह्मांड के जन्म और विनाश के रहस्य छिपे थे। वह केवल एक योद्धा नहीं था; वह प्रकृति के उस ठंडे क्रोध का अवतार था जिसने एक ही पल में जलते हुए नक्षत्रों को जमा देने की शक्ति रखी थी। "परम पद पाने के लिए, मानवता का मोह त्यागना ही होगा।" सम्राट का यह एक विचार ही उसके जीवन की सबसे बड़ी भूल और सबसे बड़ी शक्ति बनने वाला था। अपनी साधना को पूर्ण करने के लिए, उसने अपने भीतर के हर मानवीय भाव—क्रोध, वासना और अंधकार—को एक सूक्ष्म अणु (molecule) के रूप में शरीर से अलग कर दिया। उसने सोचा था कि वह अब शुद्ध प्रकाश बन चुका है। लेकिन शून्य (Void) कभी खाली नहीं रहता। वह छोटा सा त्यागा हुआ 'अंधेरा', ब्रह्मांड की भूखी ऊर्जाओं को सोखकर एक दानव बन गया। जन्म हुआ—डार्क फायर राइडर का। एक ऐसी छाया, जिसके पास सम्राट की बुद्धि थी और नरक की विनाशकारी आग। अपनी जलती हुई बाइक और आग उगलते ड्रैगन्स के साथ, उसने कसम खाई कि वह उस सम्राट को मिटा देगा जिसने उसे 'अशुद्ध' कहकर त्याग दिया था। आग और बर्फ का वह महासंग्राम शुरू हुआ जिसने कई आकाशगंगाओं को राख कर दिया। जब सम्राट की बर्फ पिघलने लगी और डार्क की आग हावी होने लगी, तब एक ऐसा बलिदान हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। सम्राट ने अपना हृदय अर्पित कर दिया। उसने डार्क को नष्ट नहीं किया, बल्कि उसे अपने भीतर समाहित (Absorb) कर लिया। आग और बर्फ, सृजन और विनाश, अब एक ही शरीर में कैद थे। यहीं से शुरू होती है 'आइस एम्परर' की वह विरासत, जहाँ वह एक नहीं, बल्कि पाँच अलग-अलग अवतारों में बँटकर ब्रह्मांड के संतुलन की रक्षा करता है। उसके सीने में अब एक 'ड्रैगन हार्ट' धड़कता है, जो याद दिलाता है कि असली सम्राट वह नहीं जो भावनाओं को त्याग दे, बल्कि वह है जो अपने अंधकार को भी जीत ले।
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